Tuesday, September 27, 2011


 मै और मेरा अनुभव वाकई जीवन मे कभी कभी  इन्सान स्पीच्लेस  अनुभव को स्पर्श करते  हुए .गुजरता है ..........वह अनुभव जिसमे  जबान कापने लगे ....... आज भी मुजे याद है वह १८ कहानी रुपे अनुभवे जो बहुत खुबसूरत अहशाश था  परन्तु १९ वा आखिरी  अनुभव........मेरी जिग्दगी के लिए अमवस्या के रात......जैसे अब काटना  मुस्किल सा हो जाये ......इसे  एक बदनुमा अनुभव से ये पता चलता है .........."इन्सान का अनुभव कार्यकुशलता को बढाता   है, वही इन्सान के  बेवकूफियां  कम  नहीं करता है "  ....................