मै और मेरा अनुभव वाकई जीवन मे कभी कभी इन्सान स्पीच्लेस अनुभव को स्पर्श करते हुए .गुजरता है ..........वह अनुभव जिसमे जबान कापने लगे ....... आज भी मुजे याद है वह १८ कहानी रुपे अनुभवे जो बहुत खुबसूरत अहशाश था परन्तु १९ वा आखिरी अनुभव........मेरी जिग्दगी के लिए अमवस्या के रात......जैसे अब काटना मुस्किल सा हो जाये ......इसे एक बदनुमा अनुभव से ये पता चलता है .........."इन्सान का अनुभव कार्यकुशलता को बढाता है, वही इन्सान के बेवकूफियां कम नहीं करता है " ....................
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